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जानिए महाभारत में कौन था जरासंध ?

जानिए महाभारत में कौन था जरासंध ?  आप में से बहुत से लोगों ने महाभारत के जरासंध के बारे में जरूर सुना होगा | महाभारत में जरासंध एक बहुत ही महत्वपूर्ण किरदार था | वह बहुत ही शक्तिशाली योद्धा था , जिसने बहुत से योद्धाओ को धूल चटाया था | उसकी सेना में एक से बढ़कर एक योद्धा थे | बल्कि महाभारत का एक योद्धा एकलव्य भी जरासंध की ही सेना में था | जरासंध का जीवन जितना रहस्यमयी था , उतना ही रहस्यमयी था उसका जन्म | जरासंध के पिता का नाम राजा ब्रहदरथ था | राजा ब्रहदरथ की दो पत्नीया थी | लेकिन राजा ब्रहदरथ को दोनों में से एक से भी कोई भी संतान नहीं हुई और राजा की ये इकछा थी कि उसकी दोनों ही पत्नियों से उसे एक एक पुत्र प्राप्त हो क्युकी वो अपनी दोनों पत्नियों से समान प्रेम करते थे | एक बार राजा ब्रहदरथ अपनी पत्नियों सहित एक ऋषि के आश्रम पहुचे | जहां उन्होंने ऋषि से पुत्र प्राप्ति की याचना की |  ऋषि ने राजा को एक आम दिया और उन्हे अपनी पत्नी को खिलाने के लिए कहा | क्युकी राजा अपनी दोनों पत्नियों से समान प्रेम करते थे इसलिए उन्होंने उस आम को आधा आधा अपनी दोनों पत्नियों को खिला दिया | कुछ समय के ...

हिन्दू धर्म के अनुसार कितने युग हैं ?

हिन्दू धर्म के अनुसार कितने युग हैं ?  पौराणिक कथाओ के अनुसार हमारे हिन्दू धर्म में चार युगों के बारे में बताया गया हैं , सतयुग , त्रेतायुग , द्वापरयुग और कलयुग | इनमें से सतयुग सबसे पहला युग त्रेयतयुग उसके बाद वाला युग द्वापर उसके बाद और सबसे अंत में कलयुग आता हैं | अभी जिस युग में हम जी रहे हैं उसे कलयुग कहा जाता हैं | हर युग की अपनी एक अवधि होती हैं , और हर युग में पाप और पुण्य की अपनी एक सीमा होती हैं | सतयुग  सतयुग को सबसे बड़ा युग कहा जाता हैं | इस युग का समय 17,28,000 वर्ष हैं | सतयुग को सबसे बड़ा युग कहा जाता हैं | इस युग में धर्म के चारों स्तम्भ थे , अर्थात इस युग में पुण्य पाप से बहुत अधिक था | इस युग में मनुष्य की आयु भी बहुत लंबी हुआ करती थी क्युकी इस युग में पाप ना के बराबर होता था तो इस युग में मनुष्यों का जीवन बहुत ही सुखद होता था | इस युग में मनुष्यों की औसत आयु 1 लाख वर्ष थी | इस युग में भगवान विष्णु ने वराह , क्रूम , मत्स्य और नरसिंह अवतार लिए थे और ये सभी अमानवीय अवतार थे | इस युग में मनुष्य की औसत उचाई 33 फुट थी | इस युग में पाप 0% और पुण्य 100% था |  त्...

आखिर महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में ही क्यू लड़ा गया ?

आखिर महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में ही क्यू लड़ा गया ? आप सभी ने महाभारत के युद्ध के बारे में जरूर सुना होगा| और आप में से बहुत से लोग ये भी जानते होंगे कि महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में लड़ा गया था| लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा हैं आखिर महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में ही क्यू लड़ा गया ? इसके पीछे एक कारण हैं जो आज मैं आपको इस विडिओ में बताऊँगा| जब महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था तब श्रीकृष्ण ने अपने सभी दूतों को भारत के सभी दिशाओ में जाकर एक ऐसी भूमि को खोजने के लिए कहा जहां कि क्रोध , लालच , अहंकार जैसे संस्कार पर्याप्त मात्रा में हो| क्युकी श्रीकृष्ण बुराई को पूरी तरह से मिटा देना चाहते थे , क्युकी उन्हे पता था कि युद्ध में भाई भाई को मरता देख कौरव और पांडव आपस में संधि कर सकते हैं , इसलिए उन्हे एक ऐसी भूमि की तलाश थी जहां युद्ध करते हुए पांडव और कौरव पक्ष में एक दूसरे के प्रति दया ना पैदा हो| जब श्रीकृष्ण अपने दूतों को जगह जगह भेजते हैं  तो उनमें से एक दूत उन्हे आकर कुरुक्षेत्र के बारे में ऐसी बात बताता हैं जिसको सूनने के बाद श्रीकृष्ण तुरंत ही इसी भूमि में युद्ध ह...

इस वजह से मनाया जाता हैं ओणम

इस वजह से मनाया जाता हैं ओणम  अभी देश के दक्षिण में सतिथ केरल में ओणम का पर्व मनाया जा रहा हैं| ये पर्व 20 अगस्त को शुरू हुआ हैं और 31 तारीख तक चलेगा| बचपन से आपने भी इस ओणम पर्व के बारे में जरूर सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी सोच हैं कि आखिर ओणम मनाया क्यू जाता हैं , तो आज के इस लेख में हम आपको ओणम के पर्व का इतिहास बताते हैं|  ओणम का इतिहास  ओणम का पर्व भारत के दक्षिण में सतिथ केरल राज्य में मलयाली समाज द्वारा मनाया जाता हैं| ओणम पर्व का इतिहास राजा बलि से जुड़ा हुआ हैं| पौराणिक कथा के अनुसार बलि नाम के एक पराक्रमी राजा हुआ करते थे , जो कि अपनी प्रजा में सर्वप्रिय हुआ करते थे| उनकी अच्छाइओ के चर्चे देवताओ तक थे| कहा जाता हैं कि अपने समय में राजा बलि बहुत ही दयावान राजा थे| देवता भी उनकी अच्छाई से ईर्षा करने लगे थे| एक बार राजा बलि के अंदर अहंकार आ गया| राजा बलि भगवान विष्णु के भक्त थे और अपने भक्त राजा बलि इस दशा को देखकर उन्होंने बलि को पाप मुक्त करने का सोचा| वे राजा बलि के राज्य में एक वामन का रूप धर कर आए| वे राजा बलि से मिले| राजा बलि ने उनका सत्कार किया और उनसे कुछ ...

कैसे हुआ था महाभारत के सबसे शक्तिशाली योद्धा का जन्म ?

कैसे हुआ था महाभारत के सबसे शक्तिशाली योद्धा का जन्म ? भीष्म  :-   भीष्म महाभारत के सबसे शक्तिशाली योद्धा थे l भीष्म का जन्म ही सबसे बड़ा रहस्य हैं  महाभारत के अनुसार कुरु के वंश में आगे चल कर शांतनु नाम के राजा होते हैं जो कि अपने समय के बहोत ही पराक्रमी राजा होते हैं  उनके राज्य बहोत ही दूर तक फैला था                                                      एक दिन राजा  शांतनु गंगा नदी के तट पर टहल रहे थे   तभी उन्होंने गंगा को देखा जो वही पर विचर रही थी गंगा को देखते ही शांतनु को गंगा से प्रेम हो गया  गंगा को भी शांतनु बहोत ही पसंद आते हैं    दोनों एक दूसरे से विवाह कर लेते हैं    लेकिन विवाह से पहले गंगा ने शांतनु से एक शर्त रही थी कि विवाह के बाद वो जहा भी जाना चाहे या कुछ भी करे शांतनु उन्हे रोकेंगे नहीं इस पर शांतनु मान गए विवाह के बाद गंगा को एक पुत्र होता हैं जिसे वे ले जाकर नदी में बहा...